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21
أَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَسَلَكَهُ يَنابيعَ فِي الأَرضِ ثُمَّ يُخرِجُ بِهِ زَرعًا مُختَلِفًا أَلوانُهُ ثُمَّ يَهيجُ فَتَراهُ مُصفَرًّا ثُمَّ يَجعَلُهُ حُطامًا ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَذِكرىٰ لِأُولِي الأَلبابِ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से पानी उतारा, फिर धरती में उसके स्रोत प्रवाहित कर दिए; फिर उसने द्वारा खेती निकालता है, जिसके विभिन्न रंग होते है; फिर वह सूखने लगती है; फिर तुम देखते हो कि वह पीली पड़ गई; फिर वह उसे चूर्ण-विचूर्ण कर देता है? निस्संदेह इसमें बुद्धि और समझवालों के लिए बड़ी याददिहानी है