You are here: Home » Chapter 54 » Verse 25 » Translation
Sura 54
Aya 25
25
أَأُلقِيَ الذِّكرُ عَلَيهِ مِن بَينِنا بَل هُوَ كَذّابٌ أَشِرٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"क्या हमारे बीच उसी पर अनुस्मृति उतारी है? नहीं, बल्कि वह तो परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।"